ये किस मुकाम पर मुझको ला दिया तूने ?
कुछ बचा ही नहीं, जिसे पाने का मैं प्रयास करूँ |
कुछ बचा ही नहीं, जिसे पाने का मैं प्रयास करूँ |
तूने,
कवि की कविता को अर्थहीन,
महत्वाकांक्षी को महत्वहीन,
और, 'प्रदीप' को अँधेरे का प्रेमी बना दिया ?
ये नदी बनायी है,
तो मुझको थोड़ी प्यास दे |
खुदा कहूँ मैं तुझे,
ऐसी मुझको आस दे |
वर्ना,
तेरी रचना अर्थहीन,
तू महत्वहीन,
और, तेरे मंदिरों में अँधेरा हो जायेगा ||
कवि की कविता को अर्थहीन,
महत्वाकांक्षी को महत्वहीन,
और, 'प्रदीप' को अँधेरे का प्रेमी बना दिया ?
ये नदी बनायी है,
तो मुझको थोड़ी प्यास दे |
खुदा कहूँ मैं तुझे,
ऐसी मुझको आस दे |
वर्ना,
तेरी रचना अर्थहीन,
तू महत्वहीन,
और, तेरे मंदिरों में अँधेरा हो जायेगा ||
Year 2007
'प्रदीप'
'प्रदीप'
sikyate bahut ki hai aapne upparwale ki, aapko kavita karane ki pyas di hai na
ReplyDeletevery nice poem...bina pyas ke jeevan soona
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