तेरी आँखों के सिवा
और पीने का सहारा न रहा |
शर्म से तूने क्यूँ ये पलकें झुका लीं हैं सनम,
हाय ! ये जाम भी हमारा न रहा ?
उजले पैमाने में जो काली शराब थी पहले
तस्वीर अपनी ही उसमे देखी थी हमने |
बुरा हो पलकों का जिनसे
निशाँ हमारा न रहा |
तेरी आँखों के सिवा ..................
बिन पीये हम जी न सकेंगे अबसे,
तेरी आँखों ने जो अब पर्दा किया हमसे,
उसी परदे का कफ़न देना
जो ये बेचारा न रहा |
तेरी आँखों के सिवा......................
इस तरह पर्दा तो ये हट सकेगा कभी,
रूह के मेरी न ये लगेगा कभी,
हाय ! ये जाम अब भी हमारा न रहा ?
तेरी आँखों के सिवा
और पीने का सहारा न रहा ||
और पीने का सहारा न रहा |
शर्म से तूने क्यूँ ये पलकें झुका लीं हैं सनम,
हाय ! ये जाम भी हमारा न रहा ?
उजले पैमाने में जो काली शराब थी पहले
तस्वीर अपनी ही उसमे देखी थी हमने |
बुरा हो पलकों का जिनसे
निशाँ हमारा न रहा |
तेरी आँखों के सिवा ..................
बिन पीये हम जी न सकेंगे अबसे,
तेरी आँखों ने जो अब पर्दा किया हमसे,
उसी परदे का कफ़न देना
जो ये बेचारा न रहा |
तेरी आँखों के सिवा......................
इस तरह पर्दा तो ये हट सकेगा कभी,
रूह के मेरी न ये लगेगा कभी,
हाय ! ये जाम अब भी हमारा न रहा ?
तेरी आँखों के सिवा
और पीने का सहारा न रहा ||
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