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Monday, July 2, 2012

'पर्दा'


तेरी आँखों के सिवा
और पीने का सहारा रहा |
शर्म से तूने क्यूँ ये पलकें झुका लीं हैं सनम,
हाय ! ये जाम भी हमारा रहा ?

उजले पैमाने में जो काली शराब थी पहले
तस्वीर अपनी ही उसमे देखी थी हमने |
बुरा हो पलकों का जिनसे
निशाँ हमारा रहा |
तेरी आँखों के सिवा ..................

बिन पीये हम जी सकेंगे अबसे,
तेरी आँखों ने जो अब पर्दा किया हमसे,
उसी परदे का कफ़न देना
जो ये बेचारा रहा |
तेरी आँखों के सिवा......................

इस तरह पर्दा तो ये हट सकेगा कभी,
रूह के मेरी ये लगेगा कभी,
हाय ! ये जाम अब भी हमारा रहा ?
तेरी आँखों के सिवा
और पीने का सहारा रहा ||
 

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