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Wednesday, July 11, 2012

संबोधन


कौन सा संबोधन दूं तुम्हे ?
किस नाम से तुम्हे लूं पुकार ?
रूठो तो मैं 'प्रिये' कहूं ,
हाँ कर दो तो मैं कहूं 'यार' |
किस नाम से तुम्हे लूं पुकार ?

ये मुस्काना छोड़ दे,
नज़रें झुकाती क्यूँ छले?
मासूम है या छल रही ?
इतना बता मुझको अरे ;
असहाय हूँ, असमर्थ हूँ
असमंजस में हूँ मैं पड़ा
कौन सी है यह अवस्था?
कहते क्या इसको ही प्यार ?
किस नाम से तुम्हे लूं पुकार ?

तू शमा नहीं, मैं हूँ परवाना
ही हूँ तेरा दीवाना |
रहता हूँ तेरे करीब
तुझसे पल-पल हूँ जाना पहचाना |
फिर क्यूँ रहती इतनी ख्वाहिश,
चुपके से तुम्हे लूं निहार?
कहते क्या इसको ही प्यार ?
किस नाम से तुम्हे लूं पुकार ?

तू नहीं पड़ा मैं शांत हूँ
आकर्षण कहता प्रशांत हूँ |
एक नहीं हजारों बार
कह चुका नहीं प्रेमान्ध हूँ |
फिर क्यूँ जब तुम आती हो
चेहरे पर आता निखार?
कहते क्या इसको ही प्यार ?
किस नाम से तुम्हे लूं पुकार ?                      
 'प्रदीप'

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